अपना अपना आतंक

September 23, 2008 by itbraintech

एक महान दर्शन है प्रायश्चित । कहा गया है कि मन से किया गया पछतावा से सारे पाप धुल जाते हैं । गलती मान लेने से से भी मन निर्मल हो जाता है । निर्मल मन ही है हमारे प्रधानमंत्री का ।

मान लिया उन्होने कि देश के खुफिया तंत्र में कमी है । कोई दूसरा देश होता तो उसका प्रधानमंत्री यह भी कह सकता था कि आतंकवादी धमाके के लिए सरकार नहीं लोग जिम्मेदार हैं ।

खुफिया तंत्र में का बड़ा नाम है सीबीआई का । यह लगभग रामबाण दवा है । जैसे हर बुखार बदन दर्द में लोग पैरासिटामॉल खा कर अपना काम चला लेते हैं , वैसे ही मुर्गी गायब होने पर भी सीबीआई से जांच की मांग कर लेते हैं ।

सीबीआई भी आश्वासन समिति जैसा हो गया है । यह भी कह सकते हैं कि झोला छाप डॉक्टर हो गया है । इतने ज्यादा जांच करने पड़ रहे हैं कि खुद ही जांच पड़ताल का विषय हो गया है ।

हमारे देश में आईबी भी है । आईबी का दो मतलब होता है । एक तो इंसपेक्शन बंगलो और दूसरा इंटेलिजेंस ब्यूरो । यह पहला ज्यादा है , दूसरा कम । इसका बुनियादी काम राजनीतिक खुफियागिरी करना है ।

नेता का “ब्रोकेन न्यूज” के “बाइट” या पार्टी की बैठक में कहा सुना को सरकार को बताना होता है । जो जानकारी सबको होती है । वही जानकारी सरकार को बताना होता है । आखिर यह अंग्रेजों के जमाने का खुफिया तंत्र है ।

खुफिया तंत्र का सुपर स्टार है रिसर्च एंड एनालिसिस विंग । यह आंतरिक सुरक्षा पर कम , देश के बाहर का जेम्स बांड है । इससे ज्यादा जानकारी इंटरनेट के ब्लॉग पर होती है । पर है बिना हिट अमिताभ बच्चन जैसा मिलेनियम स्टार ।

इसके अलावा भी न जाने कितने लोग खुफियागिरी के काम में लगे हैं । यह सब शेयर बाजार जैसे ही हो गए हैं । अमेरिका में जुकाम  और हमारे शेयरबाजार को वायरल हो जाता है ।

प्रधानमंत्री की महानता तो देखिए कि आसानी से मान ली इन सबकी कमी । बस इसे दूर करना है । 1991 से यह सोचा जा रहा है कि इसे दूर करना है । सोचते रहिए , धमाका पास होता रहता है ।

मंत्रिमंडल का फैसला लालू दर्शन जैसा ही होता है । मंत्रिमंडल की विशेष बैठक की मांग कर खुद उससे गैरहाजिर रहते हैं । मंत्रिमंडल फैसला करता है । उस पर अमल नहीं करता है ।

किसी दिन कोई मंत्री ही सुझाव दे सकता है कि अलग से एक अमल का मंत्रिमंडल होना चाहिए । एक मंत्रिमंडल फैसला करेगा । दूसरा उस पर अमल करेगा । मंत्रिमंडल न हुआ सीसीटीवी हो गया । लगा दिया । पर इसे कोई मॉनिटर नहीं करता ।

जड़ में कोई नहीं जाता । आतंकवाद की अम्मा को खुफियातंत्र नहीं समझ पाता । धमाका होने के बाद बताता है कि कबाड़ी की कृपा से देश बच गया । कभी कभी लगता है कि कबाड़ी ही है खुफिया तंत्र की खुफियागिरी ।